छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 क्या है?
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में अवैध धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 पेश किया। राज्य मंत्रिपरिषद ने 10 मार्च 2026 को विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी थी। इसके बाद इसे विधानसभा के बजट सत्र में प्रस्तुत किया गया।
छत्तीसगढ़ विधानसभा ने 19 मार्च 2026 को इस विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया। विधेयक में बल, प्रलोभन, कपटपूर्ण साधनों, अनुचित प्रभाव, मिथ्या निरूपण और कुछ अन्य माध्यमों से किए जाने वाले अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक का मुख्य उद्देश्य
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति को बलपूर्वक, धोखे से, अनुचित प्रभाव डालकर या किसी प्रकार का अनुचित लाभ देकर धर्म परिवर्तन कराने की गतिविधियों को नियंत्रित करना है।
विधेयक में डिजिटल माध्यमों को भी ध्यान में रखा गया है। यानी सोशल मीडिया और अन्य electronic communication माध्यमों का इस्तेमाल करके किए जाने वाले ऐसे धर्मांतरण भी इसके दायरे में आ सकते हैं, जो विधेयक में बताए गए अवैध तरीकों से संबंधित हों।
प्रलोभन की परिभाषा
विधेयक में “प्रलोभन” की अवधारणा को व्यापक रूप से परिभाषित किया गया है।
इसमें नकद या वस्तु के रूप में लाभ, आर्थिक लाभ, रोजगार, सेवा, मुफ्त शिक्षा, चिकित्सा सुविधा, विवाह का वादा और बेहतर जीवनशैली जैसे लाभों का उल्लेख किया गया है।
धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया
विधेयक में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को अधिक औपचारिक और पारदर्शी बनाने के लिए प्रावधान किए गए हैं।
धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सक्षम प्राधिकारी के समक्ष घोषणा प्रस्तुत करनी होगी। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।
सामूहिक धर्मांतरण
विधेयक में “सामूहिक धर्मांतरण” को भी अलग श्रेणी के रूप में संबोधित किया गया है।
विधेयक के अनुसार एक ही कार्यक्रम में दो या उससे अधिक व्यक्तियों के धर्म परिवर्तन को सामूहिक धर्मांतरण की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मामलों में सामान्य मामलों की तुलना में अधिक कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।
विशेष वर्गों के लिए प्रावधान
विधेयक में नाबालिगों, महिलाओं, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों तथा SC, ST और OBC समुदाय से संबंधित व्यक्तियों के मामले में अधिक कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।
सामूहिक अवैध धर्मांतरण के मामलों में भी कठोर सजा का प्रावधान रखा गया है।
डिजिटल माध्यमों का समावेश
वर्तमान समय में धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियां केवल प्रत्यक्ष संपर्क तक सीमित नहीं हैं। विधेयक में digital platforms और electronic communication को भी ध्यान में रखा गया है।
इसका उद्देश्य इंटरनेट, सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए बल, धोखाधड़ी, प्रलोभन या अनुचित प्रभाव जैसे तरीकों से किए जाने वाले धर्मांतरण को भी कानूनी दायरे में लाना है।
पुराने कानून से संबंध
नया विधेयक छत्तीसगढ़ के पहले से मौजूद धर्मांतरण संबंधी कानूनी ढांचे को बदलने के उद्देश्य से लाया गया है। उपलब्ध विधेयक-संबंधी विवरण के अनुसार यह 1968 के छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम का स्थान लेने के लिए प्रस्तावित किया गया है।
CGPSC के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
यह विषय CGPSC के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें छत्तीसगढ़ की समसामयिक राजनीति और शासन व्यवस्था के साथ भारतीय संविधान, मौलिक अधिकार, राज्य विधानमंडल और कानून निर्माण जैसे विषय भी जुड़े हुए हैं।
परीक्षा में इससे विधेयक का नाम, वर्ष, विधानसभा द्वारा पारित किए जाने की तारीख, इसका उद्देश्य, धर्मांतरण की विभिन्न श्रेणियां और प्रमुख दंड प्रावधानों से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 राज्य में अवैध धर्मांतरण को नियंत्रित करने के लिए लाया गया एक महत्वपूर्ण विधायी कदम है। इसमें बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, गलत प्रस्तुतीकरण और डिजिटल माध्यमों से जुड़े मामलों को ध्यान में रखा गया है। विधेयक का पारित होना छत्तीसगढ़ के 2026 के प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक Current Affairs घटनाक्रमों में शामिल है।