प्रवीण देहरी ने ग्रामीण परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी अंडा इनक्यूबेटर-सह-हैचिंग मशीन विकसित की है, जिसका उपयोग कड़कनाथ सहित विभिन्न मुर्गी नस्लों के अंडों से चूजे तैयार करने के लिए किया जा सकता है।
मशीन की एक बैच में 800 अंडों की क्षमता है और इसकी औसत हैचिंग क्षमता लगभग 85% बताई गई है। इसमें अंडों को स्वतः घुमाने तथा तापमान और आर्द्रता नियंत्रण जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। मशीन को ग्रामीण परिस्थितियों के लिए पोर्टेबल, सरल और उपयोग में सुविधाजनक बनाया गया है।
इस तकनीक का व्यावसायीकरण भी किया गया है। PIB के अनुसार अब तक 54 से अधिक मशीनें बेची जा चुकी हैं तथा कांकेर और आसपास के जिलों में लगभग 230 से 450 किसानों ने इस तकनीक को अपनाया है। इससे किसानों की व्यावसायिक हैचरी पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है।
मशीन की लागत लगभग ₹60,000 बताई गई है। यह छोटे एवं मध्यम पोल्ट्री किसानों के साथ-साथ Self Help Groups (SHGs) और Farmer Producer Organisations (FPOs) के लिए भी उपयोगी है।
इस नवाचार के व्यावसायीकरण के बाद प्रवीण देहरी की वार्षिक आय लगभग ₹3–7 लाख से बढ़कर ₹18–24 लाख तक पहुंचने की जानकारी PIB ने दी है।
पुरस्कार से जुड़ी जानकारी
उन्हें ICAR Innovative Farmer Award 2025-26 प्रदान किया गया। यह पुरस्कार ICAR–National Academy of Agricultural Research Management (NAARM), Hyderabad के स्वर्ण जयंती समारोह एवं 51वें स्थापना दिवस के अवसर पर दिया गया।
प्रवीण देहरी को इस पुरस्कार के लिए ICAR–National Institute of Biotic Stress Management (NIBSM), Raipur के निदेशक द्वारा नामांकित किया गया था। उनके नवाचार को ICAR-NASF परियोजना के अंतर्गत समर्थन एवं प्रलेखन भी मिला।