कृषक उन्नति योजना क्या है?
कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ सरकार की प्रमुख कृषि योजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य किसानों की कृषि लागत को कम करना, उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाना और किसानों की आय में सुधार करना है।
योजना के माध्यम से किसानों को उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक, कृषि यंत्रीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है।
फसल विविधीकरण पर जोर
छत्तीसगढ़ में कृषि का एक बड़ा हिस्सा धान पर निर्भर है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने कृषक उन्नति योजना के दायरे में अन्य खरीफ फसलों को भी शामिल किया है।
इसका उद्देश्य केवल धान पर निर्भरता कम करना नहीं है, बल्कि दलहन और तिलहन के उत्पादन को बढ़ाकर राज्य को इन फसलों के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना भी है।
किन फसलों को प्रोत्साहन?
फसल विविधीकरण के तहत निम्न फसलों को शामिल किया गया है:
• दलहन
• तिलहन
• मक्का
• कोदो
• कुटकी
• रागी
• कपास
छत्तीसगढ़ सरकार के अनुसार इन फसलों की खेती करने वाले पात्र किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन और गिरदावरी में रकबे की पुष्टि के बाद आदान सहायता राशि दी जाती है।
धान के स्थान पर दूसरी खरीफ फसल लेने पर सहायता
योजना का एक महत्वपूर्ण प्रावधान उन किसानों के लिए है जो पहले धान की खेती करते थे और अब धान के स्थान पर दूसरी खरीफ फसल लेना चाहते हैं।
ऐसे पात्र किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पंजीयन और गिरदावरी में रकबे की पुष्टि के बाद ₹11,000 प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि देने का प्रावधान किया गया है।
अन्य खरीफ फसलों के लिए सहायता
दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास जैसी चिन्हित खरीफ फसलों की खेती करने वाले पात्र किसानों को ₹10,000 प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि देने का प्रावधान है।
2026-27 के बजट में प्रावधान
छत्तीसगढ़ के 2026-27 बजट में कृषक उन्नति योजना के लिए ₹10,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
बजट दस्तावेज में योजना को आधुनिक कृषि तकनीक, बेहतर agricultural inputs, उत्पादकता वृद्धि और crop diversification से जोड़ा गया है।
योजना का उद्देश्य
कृषक उन्नति योजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:
किसानों की कृषि लागत कम करना।
कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाना।
किसानों की आय में वृद्धि करना।
आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना।
दलहन और तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देना।
फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना।
कृषि को अधिक लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में काम करना।
किसानों को सहायता कैसे मिलती है?
योजना का लाभ लेने के लिए पात्र किसानों का एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन आवश्यक है।
इसके अलावा संबंधित फसल के वास्तविक रकबे की पुष्टि गिरदावरी के माध्यम से की जाती है। पात्रता पूरी होने के बाद निर्धारित रकबे के आधार पर आदान सहायता राशि प्रदान की जाती है।
फसल विविधीकरण क्यों जरूरी है?
फसल विविधीकरण से किसानों को एक ही फसल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। अलग-अलग फसलों को अपनाने से कृषि जोखिम को कम करने, मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार उत्पादन को संतुलित करने में मदद मिल सकती है।
छत्तीसगढ़ के संदर्भ में दलहन, तिलहन और लघु धान्य फसलों को बढ़ावा देना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे राज्य में कृषि विविधता बढ़ाने के साथ पोषण और स्थानीय कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को भी समर्थन मिल सकता है।
2026 में कृषि विविधीकरण पर व्यापक जोर
जनवरी 2026 में केंद्रीय कृषि मंत्री की छत्तीसगढ़ समीक्षा बैठक में भी फसल विविधता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों, किसानों और केंद्र-राज्य अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाने की बात कही गई थी। इसका उद्देश्य स्थानीय कृषि-जलवायु के अनुसार फसल विविधीकरण की रणनीति तैयार करना था।
इससे स्पष्ट होता है कि फसल विविधीकरण 2026 में छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण policy focus बना हुआ है।
CGPSC के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
यह विषय CGPSC के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें छत्तीसगढ़ की कृषि, सरकारी योजनाएं, फसल विविधीकरण, किसानों की आय, दलहन-तिलहन उत्पादन और राज्य का बजट जैसे कई विषय जुड़े हैं।
परीक्षा में योजना की राशि, पात्र फसलें, सहायता राशि, पंजीयन प्रक्रिया और योजना के उद्देश्यों पर factual questions पूछे जा सकते हैं।
निष्कर्ष
कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ में किसानों को कृषि लागत से राहत देने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने वाली महत्वपूर्ण योजना है।
धान के अलावा दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास जैसी फसलों को प्रोत्साहन देने से राज्य में कृषि क्षेत्र को अधिक विविध बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं 2026-27 के बजट में ₹10,000 करोड़ का प्रावधान इस योजना को राज्य की कृषि नीति में महत्वपूर्ण स्थान देता है।