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National / Economy / Energy 📅 01 Aug 2026 ★ Featured

समुद्र मंथन योजना 2026: भारत की Offshore Oil और Gas Exploration को नई गति

समुद्र मंथन भारत सरकार की नई National Offshore Exploration Scheme है, जिसका उद्देश्य समुद्र में मौजूद तेल और प्राकृतिक गैस संसाधनों की खोज एवं उत्पादन को बढ़ावा देना है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को ₹84,084 करोड़ के Phase-I परिव्यय के साथ मंजूरी दी है। योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू किया जाना है। इसका प्रमुख उद्देश्य घरेलू हाइड्रोकार्बन उत्पादन बढ़ाकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और आयात पर निर्भरता कम करने में सहायता करना है। 


📰 समाचार / महत्वपूर्ण जानकारी

समुद्र मंथन योजना क्या है?

भारत सरकार ने offshore oil और natural gas exploration को बढ़ावा देने के लिए National Offshore Exploration Scheme को मंजूरी दी है। इस योजना को “समुद्र मंथन” नाम दिया गया है। यह Ministry of Petroleum & Natural Gas के अंतर्गत संचालित होने वाली Central Sector Scheme है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगस्त 2026 में इस योजना को मंजूरी दी। इसके Phase-I के लिए ₹84,084 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है और योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू किया जाना है।

योजना का मुख्य उद्देश्य

भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में crude oil और अन्य hydrocarbon resources का आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर तेल और गैस के नए संसाधनों की खोज करना ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

समुद्र मंथन योजना का उद्देश्य offshore क्षेत्रों में exploration और production को तेज करना तथा deepwater क्षेत्रों में उपलब्ध संभावित hydrocarbon resources का बेहतर उपयोग करना है।

Deepwater Exploration पर जोर

समुद्र के गहरे हिस्सों में तेल और गैस की खोज तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होती है। इसके लिए advanced seismic surveys, बेहतर geological data, आधुनिक drilling technology और specialised offshore infrastructure की आवश्यकता होती है।

इस योजना के माध्यम से बेहतर data availability, risk-sharing mechanisms, common infrastructure और domestic manufacturing capabilities को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

भारत की Energy Security के लिए महत्व

भारत की आर्थिक गतिविधियों के लिए petroleum और natural gas महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत हैं। घरेलू उत्पादन बढ़ने से भविष्य में imported crude oil पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

सरकार के अनुसार, exploration सफल होने की स्थिति में योजना के तहत भारत का domestic oil और gas production लगभग 62 MMTOE से बढ़कर 80 MMTOE प्रतिवर्ष हो सकता है।

साथ ही hydrocarbon resource base को लगभग 1.6 billion TOE से बढ़ाकर 2.2 billion TOE तक करने का लक्ष्य बताया गया है।

आर्थिक महत्व

घरेलू hydrocarbon production में वृद्धि से crude oil imports पर होने वाले खर्च को कम करने में सहायता मिल सकती है।

सरकार के अनुसार, exploration सफल रहने पर अतिरिक्त उत्पादन से crude oil imports में लगभग ₹1 लाख करोड़ प्रतिवर्ष तक की कमी हो सकती है।

इसके अलावा offshore exploration ecosystem के विकास से oil और gas sector में technology, infrastructure, investment और domestic manufacturing को भी बढ़ावा मिल सकता है।

CGPSC के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

समुद्र मंथन योजना CGPSC के लिए महत्वपूर्ण Current Affairs topic है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधन, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, आयात निर्भरता और सरकारी योजनाओं से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

अभ्यर्थियों को योजना का नाम, संबंधित मंत्रालय, वित्तीय परिव्यय, implementation period और इसके प्रमुख उद्देश्यों को विशेष रूप से याद रखना चाहिए।

निष्कर्ष

समुद्र मंथन योजना भारत के offshore hydrocarbon sector को बड़े स्तर पर विकसित करने की पहल है। इसका उद्देश्य नए तेल और गैस संसाधनों की खोज के साथ-साथ exploration technology, infrastructure और domestic capabilities को मजबूत करना है। सफल implementation से भारत की long-term energy security को मजबूती मिल सकती है।

📌 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

योजना का नाम: समुद्र मंथन (Samudra Manthan)

• आधिकारिक नाम: National Offshore Exploration Scheme

• योजना का प्रकार: Central Sector Scheme

• संबंधित मंत्रालय: Ministry of Petroleum & Natural Gas

• Phase-I Outlay: ₹84,084 करोड़

• Implementation Period: वित्त वर्ष 2030-31 तक

• मुख्य क्षेत्र: Offshore Oil और Natural Gas Exploration

• प्रमुख फोकस: Deepwater Exploration और Hydrocarbon Production

• वर्तमान अनुमानित घरेलू उत्पादन: लगभग 62 MMTOE प्रति वर्ष

• संभावित लक्ष्य: लगभग 80 MMTOE प्रति वर्ष

• Hydrocarbon Resource Base: लगभग 1.6 billion TOE से 2.2 billion TOE

• संभावित प्रभाव: सफल exploration की स्थिति में crude oil imports में लगभग ₹1 लाख करोड़ प्रतिवर्ष की कमी की संभावना

💡 व्याख्या

Offshore Exploration क्या है?

Offshore exploration का अर्थ समुद्र के नीचे मौजूद geological formations में crude oil और natural gas जैसे hydrocarbon resources की खोज करना है।

Deepwater Exploration क्या है?

जब समुद्र के अपेक्षाकृत अधिक गहरे क्षेत्रों में hydrocarbon resources की खोज की जाती है, तो उसे deepwater exploration कहा जाता है। ऐसे क्षेत्रों में exploration के लिए advanced technology और specialised infrastructure की आवश्यकता होती है।

समुद्र मंथन योजना क्यों महत्वपूर्ण है?

  1. भारत के घरेलू oil और gas production को बढ़ावा देने के लिए।
  2. नए offshore hydrocarbon resources की खोज को तेज करने के लिए।
  3. भारत की energy security को मजबूत करने के लिए।
  4. Imported crude oil पर निर्भरता कम करने की दिशा में।
  5. Offshore technology और infrastructure को विकसित करने के लिए।
  6. Domestic manufacturing capabilities को बढ़ावा देने के लिए।
  7. Oil और gas sector में investment तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए।
परीक्षा: CGPSC, CGPSC Prelims, CGPSC Mains, UPSC, SSC
Tags: Samudra Manthan, National Offshore Exploration Scheme, Offshore Exploration, Oil and Gas, Petroleum, Natural Gas, Energy Security, Deepwater Exploration, Indian Economy, Hydrocarbon
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‘समुद्र मंथन’ योजना का आधिकारिक नाम क्या है?

Q2

‘समुद्र मंथन’ योजना के लिए कितनी राशि का वित्तीय परिव्यय स्वीकृत किया गया है?

Q3

‘समुद्र मंथन’ योजना के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है?

Q4

समुद्र मंथन’ योजना में deepwater exploration को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा किस प्रकार की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है?

Q5

समुद्र मंथन’ योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.यह Ministry of Petroleum & Natural Gas के अंतर्गत Central Sector Scheme है।
2.योजना का कार्यान्वयन वित्त वर्ष 2030-31 तक किया जाना है।
3.योजना में offshore seismic data acquisition एवं processing तथा exploratory drilling जैसे कार्य शामिल हैं।
4.योजना का उद्देश्य केवल नए offshore oil fields की खोज करना है; exploration infrastructure और investment risk reduction इसका हिस्सा नहीं हैं।
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